बंगाल हिंसा एक सुनियोजित षड्यंत्र, फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट

बंगाल हिंसा एक सुनियोजित षड्यंत्र, फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट

बंगाल हिंसा एक सुनियोजित षड्यंत्र, फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव परिणाम के बाद हुई हिंसा को लेकर फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी। कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है कि बंगाल हिंसा एक सुनियोजित षड्यंत्र थी। हिंसा के दौरान एक दल विशेष के समर्थकों को निशाना बनाया गया। हिंसा में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ ही गुंडे और माफिया भी शामिल थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कमेटी ने कहा कि जिन लोगों ने टीएमसी को वोट नहीं दिया, उनके साथ मारपीट की गई। महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया और लोगों के घर तोड़ दिए गए। इतना ही नहीं हिंसा के बाद पीड़ितों को पुलिस के पास जाने से भी रोका गया। जांच कमेटी ने बंगाल सरकार से पीड़ितों को राहत पैकेज देने की बात कही है। साथ ही मांग की है कि पुलिस हिंसा के सभी मामलों में केस दर्ज करे।

बंगाल में चुनाव बाद भारी हिंसा, आगजनी और लूटपाट हुई थी। हिंसा में लगभग 14 लोगों की मौत हुई थी। हिंसा को लेकर सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर आरोप लगे थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हिंसा के कारणों की पड़ताल करने और राज्य में जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए चार सदस्यीय दल का गठन किया था।

कमेटी के सदस्यों ने 63 पेज की एक रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट तैयार करने के लिए टीम पश्चिम बंगाल गई थी, जहां 200 से अधिक तस्वीरों और 50 से अधिक वीडियो की एनालिसिस करके यह रिपोर्ट तैयार की गई है। कमेटी ने CRPF की सुरक्षा में हिंसा प्रभावित गांवों का भी दौरा किया और लोगों से बातचीत की।

कमेटी की रिपोर्ट

  • कमेटी ने पाया कि राज्य सरकार नागरिकों के मूल अधिकारों के संरक्षण में पूरी तरीके से असफल रही है।
  • चुनाव बाद हुई हिंसा संगठित हिंसा (प्रीमेडिटेटेड हिंसा) थी।
  • निर्दोष लोगों पर अटैक करने वाले माफ़िया, डॉन, और पुलिस रिकॉर्ड में क्रिमिनल थे।
  • एक विशेष पार्टी के लोगों पर टारगेट करके हमले किए गए।
  • पुलिस ने पूरे मामले में बड़ी लापरवाही की। शिकायत करने वाले को न्याय ना देकर, उल्टा उनके ऊपर ही केस दर्ज किए गए।
  • शिकायत के बावजूद पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया।
  • कई लोग घर छोड़कर पलायन कर गए उनके घरों को जला दिया गया।
  • एक विशेष पार्टी के लोगों के आधार कार्ड, राशन कार्ड छीन लिए गए। उनसे कार्ड वापसी के लिए तोलाबाजी (प्रोटेक्शन मनी) भी लेने की धमकी दी गई।
  • कई जगहों पर क्रूड बम और पिस्टल की अवैध फैक्ट्री भी मिलीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य सरकार कमेटी को राज्य में आने से लगातार मना कर रही थी। कमेटी के चेयरमैन ने मुख्य सचिव को ग्राउंड रियलिटी के लिए 11 मई को पत्र लिखा था, 12 मई को मुख्य सचिव ने उत्तर दिया और कहा कि कोरोना के चलते आप ग्राउंड में नहीं आ सकते हैं। अभी मामले पर कोर्ट में सुनवाई होनी है, इसलिए अभी राज्य में आना ठीक नहीं है।

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