बाबू खां, हुसैन और मिश्री खां रातभर करते रहे नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म
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पिछले कुछ वर्षों से देश में इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है कि मुसलमानों का रहना मुश्किल हो गया है। मीडिया का एक धड़ा और धर्मनिरपेक्षता का ढोंग करने वाले लोग जहर फैला रहे हैं कि हिंदूवादी संगठनों ने देशभर में मुसलमानों के लिए विकट हालात पैदा कर दिए हैं। जबकि सच्चाई इसके उलट है। हिंदुओं द्वारा मामूली झगड़े को सांप्रदायिक रंग देने वाले ये छद्म धर्मनिरपेक्ष लोग मुसलमानों की बड़ी से बड़ी आपराधिक वारदात पर चुप्पी साध लेते हैं। इन लोगों को हिंदुओं के साथ होने वाली नृशंस वारदातें दिखाई नहीं देती हैं। देश में हिंदुओं, दलितों, वनवासियों पर मुसलमानों के अत्याचार बढ़ रहे हैं।
ताजा घटना राजस्थान के टोंक जिले की है। यहां मालपुरा उपखण्ड के पचेवर थाना क्षेत्र के एक गांव में 5 मई की शाम को कई मुस्लिम युवकों ने नाबालिग किशोरी का अपहरण कर उसके साथ रातभर सामूहिक दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। आरोपितों ने नाबालिग के साथ न केवल ज्यादती की, अपितु उसके साथ बेतहाशा मारपीट कर उसे लहुलुहान भी कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद दरिंदे आरोपित नाबालिग को अगले दिन 6 मई को गांव के पास पटककर फरार हो गए। परिजनों द्वारा थाने में एफआईआर दर्ज कराने के बाद मामला प्रकाश में आया तो लोगों में रोष व्याप्त हो गया।
मामला बढ़ता देख पचेवर व डिग्गी थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी इस्लामपुरा निवासी निसार पुत्र बाबू खां, सलमान पुत्र हुसैन, जाकिर पुत्र मिश्री खां को गिरफ्तार कर एक बाल अपचारी को निरुद्ध किया है।
टोंक के पचेवर में नाबालिग से दुष्कर्म की घटना के बाद धर्मनिरपेक्षता का एक भी ठेकेदार उस पीड़िता के पक्ष में आवाज उठाने नहीं आया। सोचिए अगर यह घटना किसी हिंदू ने मुस्लिम बच्ची की साथ की होती तो देश में आसमान सिर पर उठा लिया होता।
राजस्थान में मुस्लिमों द्वारा दुष्कर्म, हत्या व पथराव आदि की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले ऐसी कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें मुसलमानों ने हिंदुओं पर जुल्म ढाए, लेकिन छद्म सेक्युलरवादियों ने कभी अपनी जुबान नहीं खोली। ऐसी घटनाओं से साफ है कि हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों द्वारा की गई लिंचिंग की खबरों से सेक्युलर तत्वों को कोई मतलब नहीं है। ऐसी घटनाओं पर ये लोग आंखें मूंद लेते हैं। लेकिन ऐसी राष्ट्रविरोधी ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत है। बड़ा सवाल यह भी है कि क्या तुष्टीकरण के आरोपों तले दबी प्रदेश सरकार नाबालिग को न्याय दिला पाएगी?