पंचांग 18 मई 2022
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सुविचार
एकेनापि सुवृक्षण पुष्पितेन सुगन्धिना।
वासितं स्याद् वनं सर्वं सुपुत्रेण कुलं यथा॥
भावार्थ
जैसे एक ही उत्तम वृक्ष विकसित होकर अपनी सुगन्ध से समस्त वन को सुवासित कर देता है, वैसे ही एक सुपुत्र समस्त कुल को यश का भागी बनाता है।
॥आप सभी का दिन मंगलमय हो॥
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