भगवान शिव का स्मरण करते हुए उनके गुणों को जीवन में लाने की आवश्यकता है- डॉ. भागवत

भगवान शिव का स्मरण करते हुए उनके गुणों को जीवन में लाने की आवश्यकता है- डॉ. भागवत
कामठी, 3 अप्रैल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि शिव जी की भक्ति बड़ी सरल है, उन्हें केवल प्रेम, भक्ति और भाव चाहिये। उनका स्मरण और उनकी पवित्रता का पालन करते हुए उनके गुणों को जीवन में लाने की आवश्यकता है। सरसंघचालक नागपुर जिले के कामठी शहर में शिवराज्य प्रतिष्ठान के तत्वावधान में आयोजित, सामूहिक शिव तांडव स्तोत्र पठन कार्यक्रम में उपस्थित जनों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मंच पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, श्रीमंत राजे मुधो जी भोसले, महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे, आमदार परिणय फुके और पूर्व विधायक टेकचंद सावरकर उपस्थित थे।
सरसंघचालक ने कहा कि भगवान शिव की महिमा अगाध है। वे देवों के देव महादेव हैं। वे अपने लिये कुछ नहीं चाहते, उन्होंने किसी का वर प्राप्त नहीं किया, वह सबको वर देने वाले हैं। लेकिन वैभव में न रहते हुए श्मशान में रहते हैं। वे कुछ मांगते नहीं। अमृत पीने के लिये भी नहीं जाते। लेकिन लोक कल्याण के लिये हलाहल पीना स्वीकार करते हैं। उनकी शक्ति इतनी प्रचंड है कि जब मंथन चलता है, और उसले हलाहल निकलता है, तो उसे पीने की शक्ति भी वह रखते हैं।
मोहन भागवत ने कहा कि राम मनोहर लोहिया कहा करते थे – भगवान राम भारत को उत्तर से दक्षिण को जोड़ते हैं, भगवान कृष्ण भारत को पूरब से पश्चिम को जोड़ते है और शिव जी तो भारत के कण-कण में, जन-जन में विद्यमान हैं। भारत को समझने का यह जो तरीका है, वही शिव जी की महिमा है। जैसे समुद्र मंथन हुआ था, वैसा ही हमारे प्रजातांत्रिक देश में विचारों का मंथन चलता है। उस मंथन से जो सहमति बनती है, वही अमृत है। उस मंथन से हम समृद्ध होते हैं, लक्ष्मी प्राप्त होती है। हमारी प्रगति की गति बढ़ती है। उस मंथन से निकला हलाहल यदि पचाया नहीं तो हम सबको जला देगा। उस को पचाने वाले शिव जी हैं। वो सबके हैं। देवों के भी और राक्षकों के भी हैं। वह कैलाश पर विराजते हैं, काशी उनका धाम है। बारह ज्योतिर्लिंगों में उनका साक्षात निवास है।