भारतीय धर्म ग्रंथों में पुरुष व स्त्री में भेद नहीं- श्रीमाली

भारतीय धर्म ग्रंथों में पुरुष व स्त्री में भेद नहीं- श्रीमाली
उदयपुर, 9 मार्च। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद रेलमगरा खण्ड द्वारा शनिवार को सादड़ी ग्राम में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य परिषद के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री मनोज कुमार उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्र सेविका समिति की उदयपुर विभाग सह कार्यवाहिका रुचि श्रीमाली ने विचार व्यक्त किए।
श्रीमाली ने भारत में प्राचीनकाल से अब तक महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय धर्म ग्रंथों में कहीं भी पुरुष व स्त्री में भेद नहीं किया गया है। जहां वैदिक काल में गार्गी, मैत्रेयी जैसी महान दार्शनिक तथा लोपामुद्रा व सूर्य सावित्री जैसी विदुषी महिलाएं हुईं, वहीं रामायण काल में माता कैकई और सीता जी जैसी पुरुषार्थी महिलाएं भी हुईं।उन्होंने कहा कि मध्यकाल में आक्रमण होने के उपरांत भी दक्षिण में रानी चेनम्मा, मध्य भारत में अहिल्याबाई होल्कर, रानी दुर्गावती, कर्णावती आदि वीर रानियों ने भारत में महिलाओं की सुदृढ़ स्थिति का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि आज भारतीय समाज नई करवट ले रहा है तथा अपने आप में सुधार करके सभी कुरीतियों को छोड़कर एक सशक्त समाज के रूप में उभर रहा है।
श्रीमाली ने कहा, भारत ज्ञान का भंडार रहा है। भारत में विपुल साहित्य सदैव से उपलब्ध रहा है। परंतु समाज में अध्ययन की प्रवृत्ति कम होने के कारण समाज विकृतियों में उलझता चला गया। उन्होंने पुस्तकों के अध्ययन पर विशेष बल दिया और पुस्तक पठन के लिए कई सरल बिन्दु भी साझा किए। साथ ही महिला संबंधित भारतीय दृष्टि बताने के लिए महिला विषयक पुस्तकों की सूची एक वीडियो क्लिपिंग द्वारा दिखाई।
कार्यक्रम में रेलमगरा खण्ड की साहित्य परिषद की मातृशक्ति, विदुषी महिलाएं, विविध क्षेत्रों में कार्यरत समाज के प्रबुद्ध जनों की अच्छी संख्या में उपस्थिति रही।
इस अवसर पर रेलमगरा खण्ड संघचालक जगदीश चंद्र ने विभिन्न विषयों की पुस्तक की प्रदर्शनी लगाई और सभी को पाठकों की पसंद अनुसार चयनित पुस्तक उपहार स्वरूप प्रदान की।
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