मक्का एक महान् हिंदू-तीर्थस्थल था
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प्रागैस्लामी अरब में हिंदू-संस्कृति- (भाग-5)
गुंजन अग्रवाल
भारतीय-परम्परा में अर्वस्थान की धार्मिक-सांस्कृतिक राजधानी व साहित्यिक क्रियाकलापों तथा अनेक उत्सवों और मेलों की कार्यस्थली ‘मक्का’ (Meccâ or Makkâh or Makkah al-Mukarramah) के लिए निम्नलिखित उल्लेख मिलता है :
एकं पदं गयायांतु मक्कायांतु द्वितीयकम्।
तृतीयं स्थापितं दिव्यं मुक्त्यै शुक्लस्य सन्निधौ॥ (A)
अर्थात् ‘(भगवान् विष्णु का) एक पद (चिह्न) गया में, दूसरा मक्का में तथा तीसरा शुक्लतीर्थ के समीप स्थापित है।’
हिंदू-मान्यतानुसार मक्का (मक्केश्वर) तीर्थ को स्वयं भगवान ब्रह्माजी ने बसाया था। इन्हीं ब्रह्माजी को मुसलमान, यहूदी और ईसाई ‘अब्राहम’ (Abraham) या ‘इब्राहीम’ (Ibrahim) कहते हैं। इस्लामी-परम्परा में मक्का को अब्राहम ने बसाया था।
आधुनिक मक्का शहर पश्चिमी सऊदी अरब के ऐतिहासिक ‘हिज़ाज़’ (al-Hejaz or Hejaz or Hijaz) क्षेत्र के मध्य स्थित इसी नाम के प्रान्त की राजधानी है। शहर का क्षेत्रफल 1,200 वर्ग किमी. (460 वर्ग मील) और जनसंख्या लगभग 15,30,000 (2010) है। यह ‘ज़ेद्दा’ से 73 किमी0. (45 मील) की दूरी पर ‘अब्राहम की घाटी’ (Valley of Abraham) में समुद्रतल से 277 मीटर (910 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है। लाल सागर (Red Sea) मक्का से केवल 50 मील (80 किमी) दूर रह जाता है। (B)
मक्का शहर अति प्राचीन काल से ही विभिन्न व्यापारिक-मार्गों के मध्य में अवस्थित होने के कारण वाणिज्यिक महत्त्व का रहा है। इस्लाम अथवा मुहम्मद साहब के प्रादुर्भाव से बहुत पूर्व से ही यह शहर ‘हरियम्’ (हरम्) सहित विभिन्न धर्मस्थलों का केन्द्र रहा है। प्रागैस्लामी युग में यहाँ 360 वैदिक देवी-देवताओं की पूजा होती थी। सन् 622 ई. में इस्लामी पैगंबर मुहम्मद साहब ने मक्का में, जो एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक-केन्द्र था, में इस्लाम की घोषणा की और तब से इस शहर ने इस्लाम के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। तब से यह शहर इस्लाम का पवित्रतम शहर हो गया है, जहाँ प्रतिवर्ष दुनिया के लगभग 10 लाख मुसलमान इस्लामी कैलेण्डर के अन्तिम महीने में ‘हज’ तीर्थयात्रा करने पहुँचते हैं। ‘हज’ तीर्थयात्रा को इस्लाम के पाँच स्तम्भों (ईमान, नमाज़, रोज़ा, ज़कात एवं हज) में से एक माना गया है।
‘हरम्’ या ‘हरियम्’?
मक्का के केन्द्र में दुनिया की सबसे बड़ी मस्ज़िद और हज़-यात्रा का केन्द्र ‘अल्-मस्ज़िद अल्-हरम्’ (Al-Masjid al-Haram) स्थित है। इसे ‘अल्-हरम् मस्ज़िद’ (Al-Haram Masjid), ‘हरम् अल्-शरीफ़’ (Haram al-Sharif), ‘मस्ज़िद अल्-शरीफ़’ (Masjid al-Sharif), ‘मस्ज़िद-ए-हरम्’ (Masjid-e-Haram), ‘प्रधान मस्ज़िद’ (Grand Mosque) और सिर्फ़ ‘हरम्’ (Haram) भी कहा जाता है। प्रख्यात इतिहास-संशोधक पुरुषोत्तम नागेश ओक (1916-2008) ने उल्लेख किया है कि अरबी-शब्द ‘हरम्’ संस्कृत के ‘हरियम्’ शब्द का अपभ्रंश है, जो विष्णु-मन्दिर का द्योतक है। (C)
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‘अल्-मस्ज़िद अल्-हरम्’ का सर्वप्रथम निर्माण सन् 638 ई. (16 हिज़री) में किया गया था। सन् 692 ई. में इसका प्रथम पुनर्निर्माण किया गया था। सन् 1399 ई. में आग और भारी बारिश से यह नष्ट हो गया। सन् 1405 ई. में इसे पुनः बनाया गया। बाद की शताब्दियों में इसका निरन्तर पुनर्निर्माण और विस्तार होता रहा। आज यह मस्ज़िद कुल 4,00,800 वर्गमीटर (43,14,211.2 वर्ग फीट) क्षेत्रफल में फैली है, जिसके विशाल संगमरमरी-प्रांगण में एकसाथ 8,20,000 हज-यात्री नमाज़ अदा कर सकते हैं । इसके बाहरी परिसर में 9 मीनारें खड़ी हैं, जिनकी ऊँचाई 89-89 मीटर है। इस विशाल मस्ज़िद से जुड़ी पाँच विशेषताएँ, जो इसे प्रागैस्लामी शिव-मन्दिर सिद्ध करती हैं, इस प्रकार हैं—

काबा प्रागैस्लामी शिव-मन्दिर है
मक्का-स्थित ‘अल्-मस्ज़िद-अल्-हरम्’ के विशाल प्रांगण के बीचोबीच लगभग 60 फीट ऊँची, 60 फीट लम्बी और 60 फीट चौड़ी (लगभग 627 वर्गफीट) एक घनाकार इमारत है, जिसे ‘काबा’ कहा जाता है। इसे ‘अल्-काबात-उल्-मुशरर्फाह’ (Al-Kābāt-ul-Musharrafah), ‘अल्-बैत-उल्-अतीक़’ (Al-Bait-ul-Ateeq) और ‘अल्-बैत-उल-हरम्’ (Al-Bayt-ul-Haram) भी कहा जाता है। इसका निर्माण मक्का के चारों ओर विस्तृत ‘सफा’ (Safa) और ‘मेरवा’ (Merwa) नामक दो पहाड़ियों के नीले ग्रेनाइट पत्थरों से किया गया है। काबा को इस्लाम की पवित्रतम इमारत माना जाता है। संसारभर के मुसलमान हज-यात्रा के दौरान इसी का दर्शन और परिक्रमा करने मक्का पहुँचते हैं। साथ ही, संसार के सभी मुसलमान, चाहे वे किसी भी देश में रहते हों, काबा की ओर ही मुँह करके नमाज़ अदा करते हैं।
काबा के एक पुराने नक़्शे से ज्ञात होता है कि काबा का निर्माण वैदिक अष्टकोणीय आकार में हुआ है। एक चतुर्भुज पर तिरछा बैठाया हुआ दूसरा चतुर्भुज— ऐसे वैदिक अष्टकोणीय आकारवाले मन्दिर पर वह बना है। मन्दिर के आठ कोणों पर वैदिक अष्टदिक्पाल— इन्द्र, वरुण, यम, अग्नि, वायु, कुबेर, ईशान और निरुत् प्रस्थापित थे। बीचोबीच वर्तमान खण्डित काबा का चौकोर है। (D) यह ‘काबा’ शब्द भी ‘गर्भगृह’ शब्द का विकसित रूप है— ‘गर्भगृह’ > ‘गाभा’ > ‘काबा’ (E)। जैसे ‘गौ’ का आंग्ल-उच्चारण ‘कौ’ हुआ है, उसी प्रकार ‘गाभा’ का ‘काबा’ हुआ है। निःसन्देह यह प्रागैस्लामी मक्केश्वर महादेव-मन्दिर का गर्भगृह रहा होगा।

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संदर्भः
हरिहरक्षेत्रमाहात्म्य (हरिहरेश्वरमाहात्म्य), 7.6; प्रकाशक: प्रभुनारायण मिश्र, गया, 1924 ई.
Islamic World, p.13
वैदिक-विश्व-राष्ट्र का इतिहास, खण्ड 1, पृ0 105, 107; खण्ड 2, पृ0 289; 472
वही, खण्ड 1, पृ. 104-105
वही, खण्ड 2, पृ. 464
(लेखक महामना मालवीय मिशन, नई दिल्ली में शोध-सहायक हैं तथा हिंदी त्रेमासिक ‘सभ्यता संवाद’ के कार्यकारी सम्पादक हैं)