परिवार में बच्चों से करें तर्कपूर्ण संवाद- राठौड़

परिवार में बच्चों से करें तर्कपूर्ण संवाद- राठौड़
बांसवाड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बांसवाड़ा के संपर्क विभाग द्वारा नगर के भारतीय विद्या मंदिर सभागार में प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य हनुमान सिंह राठौड़ ने राष्ट्र के समक्ष चुनौतियाँ और हमारी भूमिका विषय पर ऐतिहासिक तथ्यों के साथ अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के समक्ष दो प्रकार की चुनौतियां हो सकती हैं। पहली बाहरी और दूसरी आंतरिक। आज प्रत्येक राष्ट्र की परिस्थितियां अलग-अलग हो गई हैं। भू राजनैतिकवाद के बाद अब आर्थिकवाद आ गया है। आज अमेरिका जैसे विकसित राष्ट्र अस्त्र-शस्त्र बेचने का अड्डा बन गए हैं। आतंकवाद को प्रश्रय देने और उन्हें हथियार बेचने वाले ये विकसित राष्ट्र आर्थिक सुख के लिए विश्व में आतंक परोसने का कुकृत्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, जब ब्रिटिश और पुर्तगाली भारत आये थे, तब विश्व की जीडीपी में भारत का योगदान 23 प्रतिशत था। जब अंग्रेज भारत छोड़कर गए तब विश्व में भारत की जीडीपी तीन प्रतिशत रह गई। भोगवादी मानसिकता रखने वाली विदेशी शक्तियां कभी भारत को विकसित, समृद्ध और शक्तिशाली होता नहीं देखना चाहती।
राठौड़ ने कहा कि भारत सनातन संस्कृति और परंपराओं के आधार पर समस्या के सामाधन की प्रक्रिया को अपनाने वाला देश है। हम तीसरी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं, जिसका आधार युवा पीढ़ी है। देश के सम्यक विकास हेतु यहॉं की कुल जनसंख्या की 75 प्रतिशत जनसंख्या कामगारों की होनी चाहिए।
मुख्य वक्ता ने कहा कि समाजशास्त्र एवं जनसंख्या शास्त्र में जनसंख्या संतुलन के विषय में स्पष्ट उल्लेख मिलता है। प्रत्येक परिवार में न्यूनतम दो संतानें होने पर ही युवा पीढ़ी समाज निर्माण हेतु प्राप्त होगी। परिवार में बच्चों के साथ तर्कपूर्ण संवाद को आज बढ़ाने की आवश्यकता है। आने वाली पीढ़ी के सामने कई प्रकार की चुनौतियाँ हैं। उन चुनौतियों से निपटने के लिये भावी पीढ़ी राष्ट्र, धर्म की बातों को अपने जीवन में उतारे। आज समाज को विभिन्न प्रकार के षड्यंत्रों में उलझाकर तोड़ने का कार्य विदेशी फंडिंग से किया जा रहा है। कई एनजीओ इस कार्य में लगे हुए हैं। इन सभी से सावधान रहकर समाज सभी जातियों के आपसी कार्यक्रमों में सहयोगी बने।
उन्होंने कहा कि विधर्मी और कम्युनिस्ट मानसिकता सनातन सांस्कृतिक मूल्यों पर आघात कर समाज में अकर्मण्यता पैदा करना चाहती है। समाज एक रहेगा तो सेफ रहेगा। सनातन समाज को तोड़ने के लिए जाति को जन्मना बना दिया गया, जो कभी कर्म के आधार पर थी। अंत में उन्होंने राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा हेतु सभी से संगठित और सचेत रहने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता के उद्बोधन उपरांत समाज के प्रबुद्ध जनों ने अपनी जिज्ञासाएं रखीं। कल्याण मन्त्र से गोष्ठी का समापन हुआ। गोष्ठी में शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार, वाणिज्य, धार्मिक, राजनैतिक तथा समाज जीवन से जुड़े प्रबुद्व जन उपस्थित रहे।
इससे पूर्व अतिथियों द्वारा द्वीप प्रज्जवलन उपरांत मंच का परिचय रमेश गरासिया द्वारा कराया गया। कार्यक्रम की भूमिका संघ के विभाग संपर्क प्रमुख अमित चौधरी ने रखी। संचालन धनंजय पाठक ने किया। आभार अशोक सुथार ने व्यक्त किया।
#RSS #Banswara